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Khud Ko Kis Tarha Mitaon Hindi Sad Poem By Dr. Bishwa Mohan Acharya

ख़ुद को कैसे मिटाऊं ऐ ग़मे दिल हक़ तुझे मैं क्या बताऊँ बेजान तेरा नक़्श को मैं क्या सुनाऊं। सिर्फ नफ़स है बेजान ज़िंदगी मे यहां दीदा-ए-हैरां में गिरिया कैसे दिखाऊं। नाला-ओ-फ़रीयाद करते है दरे यार में ऐ उश्शाक़ तुझ से मैं अब क्या छुपाऊँ। बिस्मिल मुर्गे-चमन बना ग़मे-फ़ुर्क़त में जिगर-अफ़गार में तुझे मैं कैसे बिठाऊँ। रुख्सत हो गई रूठ कर तूं ज़ेरे-कफ़न में ऐ काफ़िरे-बदकेश ख़ुद को कैसे मिटाऊं। " प्यासा " 

Gale Lagana To Parega Hi Hindi Poem by Dr. Bishwa Mohan Acharya

गले लगाना तो पडेगा ही खुली हुई फ़िज़ा में कहीं चमन तो होगा ही  यादे वफ़ा-शिआर में दर्दोग़म तो होगा ही। सरशारे-तमन्ना में शिकवा किस बात का  तेरी रुख्सते हाल में रंजोगम तो होगा ही। चाहे जितने भी हो हसीं चेहरा इस जहां में  तेरी मासूम चेहरे की अज़्मत तो होगा ही। निकहतेँ है चारो तरफ दूर दूर तक चमन में यूँ किसी रोज़ गुलशन का बयां तो होगा ही। कौसो-क़ज़ा में लिखी हुई हो ए हालात "प्यासा" हिज़्र में तसव्बूर को गले लगाना तो पडेगा ही। डा. विश्वमोहन आचार्य " प्यासा "