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Showing posts from July 11, 2015

Khud Ko Kis Tarha Mitaon Hindi Sad Poem By Dr. Bishwa Mohan Acharya

ख़ुद को कैसे मिटाऊं ऐ ग़मे दिल हक़ तुझे मैं क्या बताऊँ बेजान तेरा नक़्श को मैं क्या सुनाऊं। सिर्फ नफ़स है बेजान ज़िंदगी मे यहां दीदा-ए-हैरां में गिरिया कैसे दिखाऊं। नाला-ओ-फ़रीयाद करते है दरे यार में ऐ उश्शाक़ तुझ से मैं अब क्या छुपाऊँ। बिस्मिल मुर्गे-चमन बना ग़मे-फ़ुर्क़त में जिगर-अफ़गार में तुझे मैं कैसे बिठाऊँ। रुख्सत हो गई रूठ कर तूं ज़ेरे-कफ़न में ऐ काफ़िरे-बदकेश ख़ुद को कैसे मिटाऊं। " प्यासा "